Neem Karoli Baba Biography in Hindi

नीम करोली बाबा का जीवन परिचय – Neem Karoli Baba Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों हमारी वेबसाइट पर आपका स्वागत है, आज हम बात करने वाले हैं नीम करोली बाबा का जीवन परिचय (Neem Karoli Baba Biography in Hindi) में आज के इस लेख में हम नीम करोली बाबा के बारे में संपूर्ण जानकारी जानेंगे और जानेंगे कि नीम करोली बाबा कौन है, वहां नीम करोली बाबा कैसे बने, नीम करोली बाबा का जीवन परिचय, नीम करोली बाबा आश्रम आदि.

दोस्तो नीम करोली बाबा ( Neem Karoli Baba ) हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे, उन्होंने अपने जीवन काल में लगभग 108 हनुमान मंदिर बनवाये थे, नीम करोली बाबा जी बहुत थी ज्ञानी और अंतर्यामी थे उसके बाद भी उन्हें इन चीजों का बिल्कुल भी घमंड नहीं था, वहां बिल्कुल साधारण जीवन जीते थे.

नीम करोली बाबा का जीवन परिचय | Neem Karoli Baba Biography in Hindi

वास्तविक नामलक्ष्मी नारायण शर्मा
प्रसिद्ध नामबाबा नीम करोली महाराज
जन्म तारिक11 September 1973
जन्म स्थानअकबरपुर उत्तरप्रदेश
प्रसिद्ध स्थाननीम करोली कैंची धाम नैनीताल उत्तराखंड
पिताजी का नामदुर्गा प्रसाद शर्मा

नीम करोली बाबा जी ( Neem Karoli Baba ) का मूल नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उनका जन्म स्थान अकबरपुर (उत्तर प्रदेश) में  सन 1900 के आस पास हुआ था.

नीम करोली महाराज के पिता का नाम श्री दुर्गा प्रशाद शर्मा था। अकबरपुर के किरहीनं गांव में ही उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुवी। 11 वर्ष कि उम्र में लक्ष्मी नारायण शर्मा का विवाह हो गया था। बाबा जी ने जल्दी ही घर छोड़ दिया और लगभग 10 वर्ष तक घर से दूर रहे.

एक दिन उनके पिता उनसे मिले और गृहस्थ जीवन का पालन करने को कहा। पिता के आदेश को मानते हुए Neem Karoli Baba घर वापस लौट आये और दोबारा गृहस्थ जीवन शुरू कर दिया.

Neem Karoli Baba जी गृहस्थ जीवन के साथ- साथ धार्मिक और सामाजिक कामों में सहायता करते थे। Neem Karoli Baba को दो बेटे और एक बेटी हुई.

कुछ समय बाद उनका घर गृहस्थी में उनका मन नहीं लगा और लगभग 1958 के आस- पास बाबा जी ने फिर से घर त्याग कर दिया। Neem Karoli Baba जी अलग- अलग जगह घूमने लगे। इसी भृमण के दौरान उनको लक्ष्मण दास, हांड़ी वाला बाबा, तिकोनिया वाला बाबा आदि नामों से जाना जाने लगा.

ये भी कहा जाता है कि बाबा जी ने मात्र 17 वर्ष की आयु में ज्ञान प्राप्त कर लिया था। नीम करोली बाबा जी ने गुजरात के बवानिया मोरबी में साधना की और वहां वो तलैयां वाला बाबा के नाम से मशहूर हो गए और वृंदावन में महाराज जी, चमत्कारी बाबा के नाम से भी जाने गए.

उनकी समाधि वृंदावन में तो है ही, पर कैंची, नीब करौरी, वीरापुरम (चेन्नई) और लखनऊ में भी उनके अस्थि कलशों को भू समाधि दी गयी। उनके लाखों देशी एवं विदेशी भक्त हर दिन इन मंदिरों एवं समाधि स्थलों पर जाकर बाबा का अदृश्य आशीर्वाद ग्रहण करते हैं.

उत्तराखंड के नैनीताल से 65 किलोमीटर दूर पंतनगर में नीम करौली नाम के एक संन्यासी का आश्रम है। बाबा का 1973 में निधन हो गया था। लेकिन आश्रम में अब भी विदेशी आते रहते हैं। यह आश्रम फिलहाल एक ट्रस्ट चलाता है.

बताया जाता है कि सबसे ज्यादा आश्रम में अमेरिका के ही लोग आते हैं, उनका आश्रम पहाड़ी इलाकों में पेड़ों के देवदार के बीच है, इस आश्रम में 5 देवी देवताओं का मंदिर है उसमें एक हनुमान जी का भी मंदिर है, भक्तों का मानना है कि बाबा जी खुद हनुमान जी के अवतार है.

नीम करोली बाबा बनने की कहानी | Story Of Becoming Neem Karoli Baba

बहुत पुरानी बात है। एक युवा योगी लक्ष्मण दास अपनी मस्ती में, हाथ में चिमटा और कमंडल लिये फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) से टूण्डला जा रही रेलगाड़ी के first class के डिब्बे में चढ़ गए, योगी अपनी ही मस्ती में खोया हुआ था, रेलगाड़ी में कुछ देर बाद एक टिकट निरीक्षक वहां आया.

निरीक्षक ने उस योगी को देखा, बाबा ने बहुत कम कपड़े पहने हुए थे, अस्त-व्यस्त बाल थे, निरीक्षक को पता चला कि योगी के पास टिकेट नहीं है, तो क्रोधित होकर निरीक्षक योगी को उल्टा सीधा बकने लगा, योगी अपनी मस्ती में मस्त था, इसलिए वह चुप रहा.

कुछ देर बाद गाड़ी नीब करोरी गांव के छोटे स्टेशन पर रूकी। टिकट निरीक्षक ने योगी को अपमानित करते हुए उतार दिया। योगी ने वहीं अपना चिमटा गाड़दिया और शांत भाव से बैठ गया.

Guard ने हरी झण्डी हिलाई, पर गाड़ी आगे बढ़ी ही नहीं और तो और पूरी भाप देने पर पहिये अपने स्थान पर ही घुमने लग गए, रेल गाड़ी के इंजन की जांच की गयी, तो वह एकदम ठीक था.

अब तो चालक, गार्ड और टिकट निरीक्षक के माथे पर पसीना  आ गया, कुछ यात्रियों ने टिकट निरीक्षक को सलाह दी कि बाबा को चढ़ा लो, तब शायद गाड़ी चल पड़े.

निरीक्षक ने बाबा से क्षमा मांगी और गाड़ी में बैठने का अनुरोध किया, बाबा बोले- चलो तुम कहते हो, तो बैठ जाते हैं, उनके बैठते ही गाड़ी चल पड़ी, इस घटना से वह योगी और नीब करौरी गांव प्रसिद्ध हो गया.

कुछ समय बाद रेलवे डिपार्टमेंट ने उस गांव में एक स्टेशन बनाया, बाबा उस घटना के बाद कई साल तक उस गांव में रहे। तब से ही लोग उन्हें नीम करोरी वाले बाबा (Neem Karoli Baba) या नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) के नाम से पुकारने लगे.

तो दोस्तों यही कारण है जिसके बाद से नीम करौली वाले बाबा प्रसिद्ध हो गए और उन्होंने इतिहास लिख दिया.

Neem Karoli Baba Nainital Ashram | Neem Karoli Baba Ashram Kainchi Dhaam

नीम करोली वाले बाबा जी ने अपना मुख्य आश्रम नैनीताल (उत्तराखण्ड) की सुरम्य घाटी में Kainchi ग्राम (KAINCHI DHAM ASHRAM) में बनाया। यहां बनी रामकुटी में वे प्रायः एक काला कम्बल ओढ़े भक्तों से मिलते थे.

नीम करोली बा ने देशभर में 12 प्रमुख मंदिर बनवाये, उनके देहांत के बाद भी भक्तों ने 9 मंदिर बनवाये हैं, इनमें मुख्यतः हनुमान जी के प्रतिमा है, बाबा चमत्कारी पुरुष थे, अचानक गायब या प्रकट होना, भक्तों की कठिनाई को भांप कर उसे समय से पहले ही ठीक कर देना, इच्छानुसार शरीर को मोटा या पतला करना, आदि कई चमत्कारों की चर्चा उनके भक्त करते हैं

बाबा का प्रभाव इतना था कि जब वे कहीं मंदिर स्थापना या भंडारे आदि का आयोजन करते थे, तो ना जाने कहां से दान और सहयोग देने वाले इकठे हो जाते थे और वह काम भली भांति पूरा हो जाता था.

लेकिन जब बाबा जी को लगा कि उन्हें शरीर त्याग देना चाहिए, तो उन्होंने भक्तों को इसका संकेत कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने समाधि स्थल का भी चयन कर लिया था.

9 सितम्बर, 1973 को वे आगरा के लिए चले, वे एक कापी पर हर दिन राम नाम लिखते थे, जाते समय उन्होंने वह कापी आश्रम की प्रमुख श्रीमां को सौंप दी और कहा कि अब तुम ही इसमें लिखना, उन्होंने अपना थर्मस भी रेलगाड़ी से बाहर फेंक दिया, गंगाजली यह कह कर रिक्शा वाले को दे दी कि किसी वस्तु से मोह नहीं करना चाहिए.

आगरा से बाबा मथुरा की गाड़ी में बैठे। मथुरा उतरते ही वे बेहोश हो गये। लोगों ने जल्दी से उन्हें रामकृष्ण मिशन अस्पताल, वृन्दावन में पहुंचाया, जहां 10 सितम्बर, 1973 की रात में उन्होंने देह त्याग दी और संसार को अलविदा कह दिया.

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कैंची मन्दिर में प्रतिवर्ष 15 जून को वार्षिक समारोह मानाया जाता है, उस दिन यहाँ बाबा के भक्तों की विशाल भीड़ लगी रहती है, महाराज जी इस युग के भारतीय दिव्य पुरुषों में से हैं, श्री नीम करोली बाबा को महाराज जी भी कहा जाता है.

ऐसा माना जाता है कि महाराज जी को 17 वर्ष की आयु से ही भगवान के बारे में विशेष ज्ञान था, भगवान श्री हनुमान उनके गुरु थे, नीम करौली बाबा जी अपने जीवन में लगभग 108 हनुमान मंदिर बनवाए थे.

नीम करोली बाबा के बारे में कुछ रोचक बातें

  • जिन्होंने नीम करोली बाबा को करीब से जाना है वह सभी कहते है की बाबा साक्षात् हनुमान जी का ही अवतार है.
  • कहते है नीम करोली बाबा ने काफी साल हनुमान जी की तपस्या की जिसके फलसवरूप उन्हें हनुमान जी की आठ सिद्धियां प्राप्त है.
  • नीम करोली बाबा कभी भी किसी भी वस्तु को किसी और चीज़ के परिवर्तित कर देते थे जैसे उनका एक चमत्कार बहुत प्रसिद्ध है उन्होंने एक बार भंडारे में देसी घी ख़तम हो जाने पर पानी को देसी घी में बदल दिया था.
  • नीम करोली बाबा अलग अलग व्यक्तियों को एक ही जगह पर दर्शन देते है जैसे अभी किसी के पास है तो उसी समय वह किसी और रूप में किसी और के साथ भी होंगे अपने भक्तो की सदैव साथ रहते है बाबा नीम करोली.
  • नीम करोली महाराज हमेसा एक ही नाम जपा करते थे केवल राम राम इसके अलावा वह कोई भी मंत्र इत्यादि नहीं बोलते थे.
  • नीम करोली बाबा पूरी दुनिया ब्रम्ह्मण करने के बाद वह उत्तराखंड के छोटे से गांव गरम पानी खेरना जगह पर आये और वहां उन्होंने सबसे पहले हनुमान मंदिर का निर्माण किया जो आज कैंची धाम के नाम से जाना जाता है.
  • नीम करोली बाबा के बहुत सारे विदेशो से भक्त जुड़े हुवे है जिसमे से एक महान भक्त Richard Alpert है जो अमेरिका की मूल निवासी है जिन्होंने नीम करोली बाबा से मिलने के बाद अपना नाम रामदास रख लिया था

निष्कर्ष

आशा करते हैं, दोस्तो आपको हमारे द्वारा बताया नीम करौली बाबा (Neem Karoli baba) का  जीवन परिचय पसंद आया होगा, हमने आपको हमारे इस लेख के जरिए Neem Karoli baba की सभी छोटी बड़ी जानकारियों से अवगत कराया और बताया कि.

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